23 August 2017(Wednesday) #DAILY NEWS

23 August 2017(Wednesday) #DAILY NEWS
1.संविधान पीठ का 3 : 2 के बहुमत से फैसला : एक साथ तीन तलाक असम्बैधानिक
• सुप्रीम कोर्ट ने तीन-दो के बहुमत से तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक साथ तीन बार तलाक बोलकर संबंध विच्छेद करने की अनुमति न तो शरिया देता है और न ही भारतीय संविधान।
• तीन तलाक संविधान में प्रदत्त समता के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर ने तीन तलाक को इस्लामिक कानून और पर्सनल लॉ का अभिन्न अंग माना और कहा कि सुप्रीम कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता और सरकार इसपर कानून लाए, लेकिन वह अल्पमत में रहे।
• जस्टिस कुरियन जोसेफ, रोहिंटन फली नरीमन और उदय उमेश ललित ने कहा कि तीन तलाक भारतीय संविधान की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। यह इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
• इस्लामिक कानून में साफतौर पर कहा गया है कि तलाक की नौबत आने से पहले पति-पत्नी के बीच सुलह सफाई की कोशिश अनिवार्य है।
• पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 395 पृष्ठ के फैसले के अंत में कहा कि तीन-दो के बहुमत में रिकार्ड की गई अलग-अलग राय के मद्देनजर तलाक-ए-बिद्दत (तीन तलाक) की प्रथा निरस्त की जाती है।
• संविधान पीठ के पांच न्यायाधीशों में से तीन ने अलग-अलग निर्णय दिए। इनमें से बहुमत के लिए लिखने वाले जस्टिस कुरियन जोसेफ और रोहिंटन फली नरीमन ने मुख्य जजमेंट लिखने वाले चीफ जस्टिस खेहर के मत से असहमति व्यक्त की।
• वह सीजेआई और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर के अल्पमत के इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं थे कि तीन तलाक धार्मिक प्रथा का हिस्सा है और सरकार को इसमें दखल देते हुए एक कानून बनाना चाहिए।जस्टिस जोसेफ, नरीमन और उदय उमेश ललित ने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस नजीर से स्पष्ट रूप से असहमति व्यक्त की कि क्या तीन तलाक इस्लाम का मूलभूत हिस्सा है।
• तीन तलाक की प्रथा पिछले लगभग 1400 साल से प्रचलित थी। तीन तलाक की प्रथा निरस्त होने के बाद अब सुन्नी मुस्लिम, जिनमें तीन तलाक की प्रथा प्रचलित थी, इस तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे क्योंकि शुरू में ही यह गैरकानूनी होगा।
• सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाक-ए-बिद्दत या एकबारगी तीन तलाक कहकर तलाक देने की प्रथा निरस्त किए जाने के बाद अब इनके पास तलाक लेने के दो ही तरीके-तलाक हसन और तलाक अहसान ही उपलब्ध हैं। तलाक अहसान के अंतर्गत मुस्लिम व्यक्ति पत्नी को लगातार तीन महीनों में एक एक बार तलाक कहकर तलाक ले सकता है।
• यह अवधि मासिक धर्म के अनुसार होती है। तलाक हसन के अंतर्गत मुस्लिम व्यक्ति मासिक धर्म के एक के बाद एक चक्र के दौरान तलाक कहकर तलाक ले सकता है, लेकिन इन तीन मासिक धर्म के चक्र के दौरान किसी प्रकार का संसर्ग नहीं होगा।
• तीन तलाक कुरान के बुनियादी सिद्धांतो के खिलाफ है। तलाक शादी तोड़ने का अंतिम उपाय है। इससे पहले सुलह का हर संभव प्रयास होना चाहिए जो एकसाथ तीन तलाक के मामले में नहीं है।
• 272 पृष्ठों का तर्कपूर्ण जजमेंट लिखने के बावजूद चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर अल्पमत में पड़ गए। सीजेआई ने कहा कि जब सरकार तलाके बिद्दत को गैर-कानूनी मानती है तो इस पर कानून क्यों नहीं लाती। आखिर हमारे कंधों को इस्तेमाल क्यों करना चाहती है सरकार।
• न्यायपालिका को अपनी सीमा में रहना चाहिए। कानून बनाना सरकार और विधायिका का काम है।चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर का जजमेंट अल्पमत में क्यों न पड़ गया हो, लेकिन अल्पसंख्यकों सहित सभी समुदायों की धार्मिक आजादी को लेकर इसमें आशंकाओं से भरी टिप्पणियां की गई हैं। सीजेआई ने कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ तीन तलाक तक ही नहीं रुकी है।
• केंद्र का हलफनामा मुस्लिम समुदाय के तलाक के बाकी तरीकों को भी अवैधानिक बता रहा है। निकाह हलाला और बहुविवाह को भी असंवैधानिक कहा गया है। अल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड भी एक ही झटके में तीन तलाक की प्रथा को गलत बता रहा है।
• जब सभी पक्ष राजी हैं तो अदालत को मोहरा क्यों बनाया जा रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को छह माह के अंदर इस विषय पर कानून बनाना चाहिए।हालांकि बहुमत के फैसले के सामने सीजेआई के निर्णय का कानूनी महत्व नहीं रह गया है। लेकिन, उनके तर्क को सिरे से खारिज करना भी कानूनविदों के लिए मुश्किल होगा।
• पांच दिन बाद 27 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि मुसलमानों में निकाह हलाला और बहुविवाह की प्रथा को भी अदालत में चुनौती दी गई है। यह सोचा जा सकता है कि देश के बुद्धिजीवी विभिन्न धर्मो में आस्था रखने वालों को किस-किस आधार पर चुनौती देंगे। इसके बारे में सिर्फ सोचा जा सकता है। हमें सावधानी बरतनी है।
• धार्मिक प्रथाओं मेंविश्वास करने वाले लोग देश के कोने-कोने में रहते हैं। उनके पर्सनल लॉ हैं। अच्छे इरादे के साथ किया गया काम भी क्या उनकी धार्मिक आस्थाओं को बदल सकता है।
• धर्म और पर्सनल लॉ उसी तरह रहने चाहिए जैसा उसके अनुयायी चाहते हैं। दूसरे लोगों के चाहने से आस्थाएं बदली नहीं जा सकती, चाहे उनमें कितना भी तर्क क्यों न हो।
• संविधान का अनुच्छेद 25 इस तरह की निजी आस्थाओं को संरक्षण प्रदान करता है। पर्सनल लॉ में दखल के मामले में अदालत को संयम बरतना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि तीन तलाक पर्सनल लॉ का हिस्सा है, लिहाजा यह मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है।
2. मुश्किलें बढ़ा सकता है हर साल नया कृषि ऋण लक्ष्य
• रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान ने हर साल बैंकों के लिए कृषि ऋण लक्ष्य घोषित करने की सरकार की नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इस व्यवस्था को जोखिमपूर्ण बताया और कहा कि यह लंबे समय में फूटने वाला बुलबुला साबित हो सकता है।
• उन्होंने कहा कि सरकार जो लक्ष्य तय करती है, बैंकिंग तंत्र उसे पूरा करने के लिए काफी सक्रिय रहता है। खान यहां एक उद्योग संगठन द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। इसका आयोजन सलाहकार फर्म डी एण्ड बी ने किया।
• खान ने कहा कि सरकार हर साल बजट में अल्पकालिक कृषि ऋण के लिए नया लक्ष्य तय करती है और बैंक लक्ष्य से अधिक कृषि ऋण का वितरण करते हैं। खान ने कहा कि इसमें से अधिकतर अल्पकालिक फसली ऋण होता है।
• उन्होंने कहा कि आज जरूरत कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश के जरिये उसकी दीर्घकालिक जरूरत को पूरा करने की है। उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश का अनुपात कुल कृषि ऋण के मुकाबले पांच साल पहले के 35 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गया है।
• खान ने कहा कि पिछले कुछ साल के दौरान कृषि क्षेत्र का कर्ज जहां 18 प्रतिशत बढ़ा है वहीं कृषि उत्पादन केवल 12 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ विभिन्न कारणों के चलते किसानों की आय लगातार कम हो रही है।
• उनकी उपज का कम मूल्य होना, मजदूरी का बोझ बढ़ना और कृषि में काम आने वाले विभिन्न सामानों की लागत बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं।कृषि क्षेत्र में भंडार गृहों, आपूर्ति श्रंखला और दूसरी ढांचागत सुविधाओं में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।
• खान पिछले साल ही रिजर्व बैंक से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि कर्ज एक दीर्घकालिक बुलबुला है, जिसे सार्वजनिक नीति के जरिये समाधान करना मुश्किल होगा।
• कई बार अल्पकालिक कृषि ऋण उपभोग कार्यों के लिए लिया जाता है, साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस तरह प्राप्त राशि का एक चौथाई धन सोना खरीदने के लिये भी इस्तेमाल किया जाता है।
3. चार सालों में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च चार लाख करोड़
• रेलवे ने पिछले चार सालों में सुधारों के जरिए उपलब्धियों का नया इतिहास रचा है। इस दौरान बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगभग चार लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई। यह नया रिकार्ड है। इससे पहले आजादी के बाद के तमाम वर्षो में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल मिलाकर 4.9 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई थी।
• पिछले तीन सालों में नई लाइनों, दोहरीकरण, सामान परिवर्तन तथा विद्युतीकरण के नए रिकार्ड कायम हुए हैं। पिछले तीन सालों में 12690 किलोमीटर दोहरीकरण के कार्य स्वीकृत हुए तथा 4378 किलोमीटर लाइनों का दोहरीकरण हुआ। इसके मुकाबले पिछले तीस वर्षो में सब मिलाकर 7192 किलोमीटर दोहरीकरण के कार्य संपन्न हुए थे।
• 6700 किलोमीटर विद्युतीकरण के कार्य स्वीकृत हुए जबकि 9000 किलोमीटर लाइनों का विद्युतीकरण पूरा किया गया।
• बायो टायलेट : अकेले एक वर्ष में ट्रेनों में 10 हजार बायो टायलेट फिट किए गए। जबकि इससे पहले दस वर्षो में कुल 34 हजार बायो टायलेट लगाए गए थे।
• खानपान : खानपान के लिए नई नीति लाई गई है। जिसके तहत पहली मर्तबा अत्याधुनिक बेस किचनों में खाना बनेगा जबकि अलग एजेंसियों के जरिए ट्रेनों में उसकी आपूर्ति की जाएगी।
• स्टेशन विकास : 65 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की तैयारी है। इनके लिए बोली की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है। हबीबगंज और गांधीधाम स्टेशनों का पुनर्विकास शुरू भी हो चुका है।
• ऑनलाइन शिकायत : सोशल मीडिया के जरिए शिकायतें दर्ज करने की नई प्रणाली विकसित की गई।
• ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग : इसके जरिए ट्रेनों में साफ-सफाई का इंतजाम किया गया है। कोई भी यात्री ‘क्लीन माइ कोच’ सेवा के जरिए अपना कोच साफ करवा सकता है। यह सुविधा 864 ट्रेनों में उपलब्ध है। ट्रेनों और स्टेशनों की रैंकिंग की जाने लगी है।
• रेलवे का सौ फीसद लेनदेन कैशलेस करने का लक्ष्य है। 99 फीसद माल आय तथा 68 फीसद यात्री आय कैशलेस हो चुकी है।
• माल ढुलाई से राजस्व वृद्धि : माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़कर 37 फीसद होने से राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। जबकि गैर किराया राजस्व में 15 फीसद का इजाफा हुआ है।
• इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग के परिणामस्वरूप दस वर्षो में 50 हजार करोड़ रुपये की बचत होने की आशा है।1ऊर्जा बचत : बिजली और डीज़ल की बचत के अलावा सौर व पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इससे दस सालों में 41 हजार करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य है।
• ई-टेंडरिंग : सभी निविदाएं अब ऑनलाइन दी जाती हैं। सामग्रियों की खरीद भी इसी तरह की जाती है। 25 हजार करोड़ रुपये की सालाना खरीदारी ई-टेंडरिंग से हो रही है।
4. आर्थिक विकास की रफ्तार अभी धीमी रहने के संकेत
• अर्थव्यवस्था की रफ्तार में फिलहाल सुस्ती बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिए जो अनुमान सामने आ रहे हैं उनसे तो लगता है कि पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी रह सकती है। सरकार इस महीने के अंत में पहली तिमाही के जीडीपी अनुमान के आंकड़े जारी करेगी।
• विभिन्न वित्तीय एजेंसियों के अब तक के अनुमानों के मुताबिक पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर 6.1 से 6.6 फीसद के बीच रह सकती है। यह बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 7.1 फीसद जीडीपी की दर से काफी कम है। हालांकि नोटबंदी के बाद बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से यह थोड़ा बेहतर होगा।
• जापानी वित्तीय एजेंसी नोमूरा का मानना है कि अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी की विकास दर 6.6 फीसद रह सकती है। एजेंसी अर्थव्यवस्था में सतत सुधार की दृष्टि से देखती है। नोमूरा का तर्क है कि नोटबंदी के बाद बीते वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी से मार्च की अवधि में जीडीपी की विकास दर 6.1 फीसद रही थी। इसके मुकाबले पहली तिमाही का प्रदर्शन संतोषजनक माना जाना चाहिए।
• हालांकि नोमूरा ने इस बात की संभावना भी जताई है कि जुलाई में जीएसटी अमल में आने से स्थितियों में सुधार दिख सकता है। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था में पूरी तरह सुधार की गुंजाइश चालू वित्त वर्ष के अंत तक ही बन पाएगी।
• नोमूरा का मानना है कि साल की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था की विकास दर तेजी से 7.4 फीसद के स्तर को छू सकती है। अलबत्ता नोमूरा का मानना है कि निवेश, औद्योगिक क्षेत्र और निर्यात के मोर्चे पर सुस्ती बनी रह सकती है।
• दूसरी तरफ रेटिंग एजेंसी इकरा का मानना है कि पहली तिमाही में जीडीपी की रफ्तार के 6.1 फीसद पर ही बने रहने की संभावना है। इसके लिए एजेंसी जीएसटी के चलते औद्योगिक क्षेत्र के उत्पादन में अनियमितता, जीएसटी पूर्व उत्पादों पर दी गई भारी भरकम छूट और रुपये की कीमत में लगातार हो रही वृद्धि को वजह मानती है।
• इकरा के मुताबिक पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर तेजी से घटकर 3.9 फीसद पर आ सकती है। इस क्षेत्र ने बीते वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.4 फीसद की वृद्धि दर हासिल की थी।
5. पाक को अमेरिका ने दी अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की नई अफगान नीति का ऐलान कर दिया। हर लिहाज से यह नीति भारत के हितों व उम्मीदों के मुताबिक है। ट्रंप ने भारत को एक अहम शक्ति मानते हुए उसके साथ रणनीतिक सहयोग को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, तो दूसरी तरफ से पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है कि वह आतंकियों पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगा पा रहा।
• ट्रंप ने अब तक अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को दी गई सबसे कड़ी चेतावनी में कहा है कि अगर वह नहीं सुधरा तो उसे बहुत कुछ खोना पड़ सकता है। ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि भारत अमेरिका की अफगान नीति का एक अहम हिस्सा है।
• भारत ने ट्रंप की अफगान नीति का स्वागत किया है। ट्रंप ने मंगलवार को अफगान और समूचे दक्षिण एशिया में स्थाई शांति की चुनौतियों को बताते हुए भारत की मदद मांगी और भारत ने भी इन चुनौतियों में हरसंभव मदद करने की बात कही है।
• विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता रवीश कुमार के अनुसार, ‘अफगानिस्तान की चुनौतियों को दूर करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने जो प्रतिबद्धता दिखाई हम उसका स्वागत करते हैं। अफगानिस्तान में शांति बहाली और वहां के स्थाई नागरिकों की सुरक्षा, स्थायित्व व उनके हितों की रक्षा का काम करता रहेगा।’ भारत ने संकेत दिया है कि वह अफगानिस्तान में पुनर्निर्माण का काम और तेज करेगा।
• ट्रंप ने अपनी नीति की घोषणा करते हुए भारत से कहा है कि वह अफगानिस्तान में आर्थिक मदद और बढ़ाए। वैसे ट्रंप ने इसे भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय कारोबार से जोड़ते हुए कहा कि भारत इस कारोबार से अरबों डॉलर कमाता है इसलिए उसे अफगानिस्तान को ज्यादा आर्थिक मदद करनी चाहिए। लेकिन भारत ने इसे खास तवज्जो नहीं दी है।
• कई जानकार मान रहे हैं कि ट्रंप ने पाकिस्तान में आतंकियों की पनाहगाह को नष्ट करने की चेतावनी भी दे दी है। वैसे पूर्व में भी अमेरिका की तरफ से इस तरह की चेतावनी दी गई है और उसका खास असर नहीं पड़ा है। लेकिन इस बार ट्रंप के तेवर बहुत तल्ख हैं।
• ट्रंप ने कहा, ‘क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बने आतंकी समूहों के खिलाफ पाकिस्तान को निर्णायक कदम उठाने ही होंगे।’ साफ है कि ट्रंप ने पाकिस्तान को हर तरह के आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। पाक की तरफ से इस दिशा में उठाया गया कदम न सिर्फ भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भारत-पाक बातचीत की राह भी खोल सकता है।
• आतंकवाद पर रवैया नहीं सुधरा तो बहुत कुछ गंवाएगा इस्लामाबाद
• राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगान नीति का भारत पर चौतरफा असर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप की अफगान नीति कई तरह से भारत को फायदा पहुंचाएगी। सबसे पहले तो ट्रंप ने वहां रह रहे अमेरिकी सैनिकों की संख्या (तकरीबन 4000) बढ़ाने की बात कही है जिसका साफ मतलब है कि वहां तालिबान और आइएस पर दबाव बढ़ेगा और स्थानीय सरकार ज्यादा मजूबत होगी।
• भारत के संबंध वहां की सरकार (राष्ट्रपति अशरफ घानी) के साथ बहुत अच्छे हैं, जबकि तालिबान के एक बड़े धड़े को पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा है। अफगान में ¨हसा के लिए जिम्मेदार हक्कानी समूह भी पाकिस्तान से ही सारी साजिशें रच रहा है।
• ऐसे में वहां भारत की मदद से स्थानीय सरकार को मजबूत करने का काम निर्बाध तरीके से चलेगा। इससे स्थानीय नागरिकों में भारत की छवि और बेहतर होगी। भारत और अफगान के बीच द्विपक्षीय कारोबारी रिश्ते मजबूत होंगे। यह भारत के कूटनीतिक हित में है कि अफगानिस्तान बतौर लोकतांत्रिक देश आगे बढ़े।
6. ईरान ने अमेरिका को दी धमकी : परमाणु करार खत्म किया तो 5 दिन में यूरेनियम संवर्धन बढ़ा देंगे
• ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि अगर अमेरिका परमाणु समझौता खत्म करता है तो वह पांच दिन के भीतर उच्च स्तरीय यूरेनियम संवर्धन फिर से शुरू कर सकता है।
• संगठन के प्रमुख अली अकबर सलेही ने सरकारी प्रसारणकर्ता आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, अगर हम एक संकल्प लेते हैं तो पांच दिनों में हम फोर्दो (परमाणु संयंत्र) में 20 फीसदी संवर्धन बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा, जाहिर है हम नहीं चाहेंगे कि ऐसा कुछ हो क्योंकि हमने जेसीपीओए (परमाणु समझौता) हासिल करने में काफी कोशिशें की हैं।
• वर्ष 2015 में विश्व के शक्तिशाली देशों के साथ हुए परमाणु समझौते में ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्म पर लगाम लगाने के बदले में उस पर लगाए प्रतिबंधों को कम किया गया। इसमें यूरेनियम संवर्धन 20 फीसदी या उससे ज्यादा बढ़ाने पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है। यूरेनियम संवर्धन 20 फीसदी या उससे ज्यादा बढ़ाना ऐसी प्रक्यिा है जिसमें ईरान परमाणु हथियार के लिए आवश्यक स्तर के करीब पहुंच जाएगा।
• अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने अभियान के दौरान बार-बार परमाणु समझौता खत्म करने की धमकी देते रहे हैं और जब ईरान ने मिसाइल परीक्षण किए और अमेरिका ने नए प्रतिबंध लागू किए तो ट्रंप पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते की भावना का उल्लंघन करने का आरोप लगाते रहते हैं।
7. सूखा है चांद का आंतरिक भाग, गर्मी से द्रव बना वाष्प
• चांद पर घर बनाने का सपना देख रहे देशों के लिए एक बुरी खबर है। वैज्ञानिकों को नवीन अध्ययन में ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे पता चलता है कि चांद का आंतरिक भाग सूखा है। इससे पहले उस पर पानी होने के संकेत मिले थे, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका खंडन करते हुए इसके विपरीत बात की संभावना जताई है।
• अपोलो 16 मिशन के दौरान एकत्र की गई पुरानी चट्टान का किया विश्लेषण : दरअसल, वर्ष 1972 में अपोलो 16 मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह से एकत्र की गई एक पुरानी चट्टान का वैज्ञानिकों ने विश्लेषण किया। इसके बाद उन्होंने बताया कि पृथ्वी के इस उपग्रह का आंतरिक भाग बहुत सूखा प्रतीत होता है।
• चंद्रमा पर नमी का सवाल इसलिए अहम है क्योंकि पानी और अन्य वाष्पशील तत्वों और यौगिकों की मात्र चंद्रमा के इतिहास और इसके बनने के बारे में संकेत देती है।
• अमेरिका में तुनिवेर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया सैन डिएगो के जेम्स डे के मुताबिक, यह एक बड़ा सवाल रहा है कि चंद्रमा सूखा है या नमी युक्त। यह बात मामूली सी लग सकती है, लेकिन असल में बेहद अहम है। बकौल डे, नतीजे दिखाते हैं कि जब चंद्रमा बना, तब वह बहुत अधिक गर्म था।
• शोधकर्ताओं का मानना है कि वह इतना अधिक गर्म रहा होगा कि पानी या चंद्रमा की स्थितियों के तहत कोई अन्य वाष्पशील तत्व या यौगिक रहा होगा तो वह बहुत पहले ही वाष्पित हो गया होगा।

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