22 August 2017(Tuesday) #DAILY NEWS

22 August 2017(Tuesday) #DAILY NEWS
1.कश्मीर पर किससे बात करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
• सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में ¨हसा रुकने पर ही बातचीत संभव हो सकती है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर व डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने सवाल किया कि केंद्र सरकार किससे बात करे और जब तक ¨हसा जारी है तब तक वार्ता कैसे हो सकती है? शीर्ष अदालत श्रीनगर की बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
• बार एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के बीती 22 सितंबर के फैसले को चुनौती दी थी। बार ने अदालत से मांग की थी कि पैलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, लेकिन अदालत ने कहा था कि केंद्र पहले से ही एक एक्सपर्ट कमेटी बना चुका है जो पैलेट गन की जगह दूसरे कम घातक हथियार के इस्तेमाल पर विचार कर रही है। इसके खिलाफ बार सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई थी।
• मामले पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधारने के केवल दो रास्ते हैं। या तो संबंधित पक्ष बैठकर समस्या का समाधान तलाश करें या फिर कोर्ट इस बारे में फैसला ले। बेंच ने कहा कि बार एसोसिएशन सम्मानित व जिम्मेदार संस्था है। उसे मामले का हल तलाशने की दिशा में काम करना चाहिए।
• अदालत ने अगली सुनवाई चार अक्टूबर को रखी है।1सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने केंद्र का पक्ष रखा। उनका कहना था कि बार कश्मीर के भारत में शामिल होने को रहस्यमय बता रही है। उनका कहना था कि केंद्र बार के सुझावों पर गौर करना चाहती है।
• सरकार ने अलगाववादी तत्वों से बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया। रंजीत कुमार का कहना था कि केवल उन लोगों से ही सरकार बात कर सकती है जिन्हें कानूनी मान्यता हासिल है। केंद्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस मसले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
• उल्लेखनीय है कि श्रीनगर बार एसोसिएशन लंबे समय से मांग कर रही है कि कश्मीर में पहले सुरक्षा बल पीछे हटें और वहां पर अफस्पा जैसे कानूनों को हटाया जाए, तभी वहां हालात सुधर सकेंगे है। बार का कहना था कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के बाद यहां के लोगों से सरकार ने बात करने की कोशिश भी नहीं की।
• पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बार कानूनी लड़ाई लड़ रही है। हालांकि पिछली दस अप्रैल को सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा था कि वह पैलेट गन के बजाय रबर की गोलियों के इस्तेमाल पर विचार कर रही है।
2. संसदीय समिति ने दलों से पूछा, क्या चंदे की सीमा व्यावहारिक है
• चुनावी सुधारों बाबत पड़ताल कर रही संसदीय समिति ने राजनीतिक दलों से पूछा है कि क्या चंदे के मामले में दो हजार रुपये कैश की सीमा व्यावहारिक है? सभी राजनीतिक दलों को प्रश्नावली भेजकर जवाब मांगा गया है।
• उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार चुनाव आयोग में पंजीकृत दलों को आयकर से छूट दी जाती है। लेकिन राजनीतिक दलों के पास जमा फंड को लेकर तमाम सवाल हाल के समय में खड़े हुए थे। उसके बाद फाइनेंस बिल 2017 के जरिये आयकर एक्ट में संशोधन के लिए सरकार कोशिश कर रही है।
• इसमें सबसे अहम राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को पारदर्शी बनाना है। इसमें यह भी कोशिश है कि राजनीतिक दल कैश के रूप में चंदा कम से कम लें। दो हजार रुपये से ज्यादा के चंदे को प्रतिबंधित करने पर सरकार का जोर है, क्योंकि यह माना जा रहा है कि राजनीतिक भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह चुनावी चंदे में पारदर्शिता काअभाव है।
• पूर्व चुनाव आयुक्तों के समूह ने इस सुधार का समर्थन किया है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि प्रावधान और ज्यादा कड़े करने की जरूरत है, क्योंकि राजनीतिक दल काले धन को सफेद करने का दूसरा रास्ता भी तलाश करने में गुरेज नहीं करेंगे।
• चुनावी बांड को लेकर भी समिति राजनीतिक दलों से सवाल कर रही है कि क्या इससे चंदा देने वाले की निजता पर कोई असर पड़ेगा। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खुद राज्यसभा में कहा था कि चुनावी बांड से न केवल चंदे में पारदर्शिता आएगी बल्कि इससे चंदा देने वाले का ब्योरा भी आयकर विभाग के पास रहेगा।
3. सात माह बाद अन्नाद्रमुक के दोनों धड़े हुए एक
• तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के दोनों धड़े लगभग सात महीने बाद सोमवार को एक हो गए। दोनों गुटों के बीच हुए समझौते के तहत पलानीस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
• पार्टी में बगावत का झंडा बुलंद करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। साथ ही पन्नीरसेल्वम अन्नाद्रमुक के राष्ट्रीय समन्वयक भी होंगे, जबकि पलानीस्वामी राज्य में यह भूमिका निभाएंगे।
• एमवी शशिकला को पार्टी के महासचिव पद से हटाने का फैसला भी लिया गया है। 1प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पन्नीरसेल्वम को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर बधाई देते हुए राज्य सरकार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। अन्नाद्रमुक के राजग में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
• पन्नीरसेल्वम को वित्त और आवास समेत नौ मंत्रलय दिए गए हैं। बगावत में उनका साथ देने वाले के पांडियाराजन को भी मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा अन्य मंत्रियों के विभाग बदले गए हैं। सोमवार को लगभग सात महीने बाद पन्नीरसेल्वम पार्टी मुख्यालय पहुंचे।
• मुख्यमंत्री पलानीस्वामी उनसे कुछ पहले ही मुख्यालय पहुंच चुके थे। कार्यकर्ताओं ने पन्नीरसेल्वम का पार्टी में वापसी पर जोरदार स्वागत किया। पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद उनके विश्वासपात्र समङो जाने वाले पन्नीरसेल्वम को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन, पार्टी महासचिव शशिकला से मतभेदों के बाद उन्हें पद से त्यागपत्र देना पड़ा।
• दरअसल, शशिकला खुद मुख्यमंत्री बनना चाहती थीं। लेकिन, भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके जेल जाने के चलते पलानीस्वामी नए मुख्यमंत्री बने। इसके बाद पन्नीरसेल्वम ने शशिकला के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया।
4. सूर्य ग्रहण के दौरान सौर तूफान का होगा अध्ययन
• अमेरिका में एक दशक बाद सोमवार को पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ा है और ऐसे में सौर कोरोना और सौर तूफान के अध्ययन के लिए नासा के अलावा भारतीय खागोल वैज्ञानिक पूरी तरह से तैयार हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान उत्पन्न होने वाले सौर तूफान के कारण दूर संचार व्यवस्था और उपग्रहों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है और इस सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक इन सभी आयामों का अध्ययन करेंगे।
• ‘‘एस्ट्रोनामिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के लोकसम्पर्क और शिक्षा समिति के अध्यक्ष निरूज रामानुजम ने कहा, सूर्य ग्रहण के दौरान जब सौर कोरोना सामने आता है और इस दौरान सौर तूफान उत्पन्न होता है, तब सूर्य से काफी मात्रा में विकिरण और कई तरह के कण निकलते हैं। इसका प्रभाव काफी मजबूत होता है।
• उन्होंने बताया कि कई बार इसका प्रभाव दो दिनों तक रहता है। इससे दूरसंचार व्यवस्था और अंतरिक्ष में उपग्रहों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे दूर संचार व्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। रामानुजम ने कहा, सौर तूफान के अध्ययन के माध्यम से हम सौर तूफान के प्रभावों के बारे में आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और इसका पूर्वानुमान लगाने का प्रयास करते हैं।
• उल्लेखनीय है कि अमेरिका में एक दशक बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण 21 अगस्त को पड़ा। इस दिन सूर्य और पृवी के बीच से चंद्रमा गुजरा।दिव्येदू नंदी ने कहा कि भारतीय खगोलविदों का दल अमेरिका के सूर्य ग्रहण के दौरान सौर कोरोना के बारे में पूर्वानुमान व्यक्त करने में सक्षम है।
• नंदी ने कहा कि भारतीय खगोलविदों के दल ने सौर कोरोना के अनुमानित स्वरूप का आकलन किया है जो अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जा सका। सूर्य की परिधि पर प्लाज्मा की किरणों दृष्टिगत होती है जिन्हें कोरोना कहते हैं।
• सूर्य जब अपने प्रभाव में होता है तब वह इतना चमकीला होता है कि उसके प्रभाव में कोरोना नहीं दिखाई देता है। लेकिन सूर्य ग्रहण के दौरान जब सूर्य और पृवी के बीच से चंद्रमा गुजरता है तब कोरोना दिखाई देता है। इस दौरान सूर्य के आकार में लगातार बदलाव आता रहता है और कोरोना का आकार भी बदलता रहता है।
5. पूरब के पड़ोसियों को संभालने में जुटा भारत
• चीन की तरफ से पड़ोसियों को धनबल से आकर्षित करने की कोशिश को भारत बखूबी समझ रहा है। लिहाजा भारत की तरफ से भी पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को संभालने की कूटनीतिक कोशिश तेज कर दी गई है। इस दिशा में नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की बुधवार से शुरू हो रही भारत यात्र काफी अहम है।
• इस दौरान भारत की तरफ से नेपाल को अतिरिक्त मदद देने की घोषणा किए जाने के आसार हैं। कुछ दिन पहले ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेपाल की यात्र की थी। नेपाल के प्रधानमंत्री देउबा के भारत आने के कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी म्यांमार की यात्रा पर जाने वाले हैं। उसके बाद मोदी अक्टूबर में बिम्सटेक देशों की शिखर बैठक में भाग लेने नेपाल भी जाएंगे।
• म्यांमार और नेपाल दो ऐसे देश हैं जिनके साथ भारत की बहुत ही लंबी सीमा है। इन दोनों देशों में चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
• चीन की तरफ से नेपाल को न सिर्फ भारी भरकम वित्तीय मदद देने की घोषणा की गई है बल्कि नेपाल को रेल और नए सड़क मार्ग से जोड़ने का भी प्रस्ताव किया गया है। अभी नेपाल ऊर्जा के लिए पूरी तरह से भारत पर आश्रित है लेकिन चीन ने कहा है कि वह नेपाल को एलपीजी की आपूर्ति कर सकता है। साथ ही चीन ने नेपाल में ऊर्जा स्नोतों की खोज के लिए अपना एक दल भी वहां भेजा है।
• दूसरी तरफ संविधान संशोधन को लेकर भारत और नेपाल के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में देउबा के भारत आने और यहां प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सरकार के उच्च स्तर पर होने वाली बातचीत का अपना महत्व है।
• वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मोदी और देउबा के बीच होने वाली वार्ता में बाढ़ एक अहम मुद्दा रहेगा क्योंकि दोनों देश इसकी विभीषिका से जूझ रहे हैं। इसके अलावा नेपाल में मधेशियों की स्थिति, भारत की मदद से लगाई जा रही पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति और भूकंप के निर्माण कार्य की प्रगति पर भी बातचीत होगी।
• दोनों देशों के अधिकारी स्तर पर बातचीत में नेपाल की तरफ से अतिरिक्त वित्तीय संसाधन की मांग की गई थी क्योंकि नेपाल की अर्थव्यवस्था भारी संकट से जूझ रही है। ऐसे में भारत की तरफ से अतिरिक्त वित्तीय मदद की घोषणा की जा सकती है।
6. रोसनेफ्ट की हुई एस्सार :कुल 82700 करोड़ रूपये में हुआ तेल कंपनी का सौदा
• रूस की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी रोसनेफ्ट और ट्राफिगुरा यूपीएस की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने 12.9 अरब डालर ( करीब 82700 करोड़ रपए) में तेल क्षेत्र की भारत की दूसरी बड़ी निजी कंपनी एस्सार आयल का अधिग्रहण कर लिया है।
• देश में यह अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) है।कंपनी ने यह जानकारी दी कि एस्सार आयल लिमिटेड के नियंत्रक शेयरधारकों एस्सार एनर्जी होल्डिंग्स लिमिटेड और आयल बिडको (मारीशस) लिमिटेड ने कंपनी की 98.26 प्रतिशत हिस्सेदारी रोसनेफ्ट और ट्राफिगुरा तथा यूनाइटेड कैपिटल पार्टनर्स (यूसीपी) की अगुवाई वाले कंसोर्टियम (केसानी इंटरप्राइजेज कंपनी लिमिटेड) को बेची है। इस सौदे के तहत रोसनेफ्ट की एस्सार आयल में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी और अन्य दो निवेशकों स्विट्जरलैंड की ट्राफिगुरा और रूस के ही यूसीपी की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
• शेष हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों के पास रहेगी। अब एस्सार आयल के 3,500 पेट्रोप पंप तथा पश्चिमी गुजरात स्थित वाडिनार बंदरगाह सुविधा तथा उसकी वाडिनार रिफाइनरी रोसनेफ्ट की होगी। इस रिफाइनरी की क्षमता 4,00,000 बैरल प्रतिदिन है।
• एस्सार आयल के इस सौदे से रुइया बंधुओं पर ऋण बोझ कम होने की उम्मीद है। एस्सार के निदेशक प्रशांत रुइया ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इससे एस्सार समूह के कर्ज में करीब 11 अरब डालर की कमी आएगी।
• रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इगोर सेशिन ने कहा कि यह एस्सार ऑयल के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है।
7. मास्टरकार्ड का अध्ययन : उपभोक्ताओं के विश्वास में आई भारी गिरावट:-
• मास्टरकार्ड के एक अध्ययन के अनुसार भारत में इस साल की पहली छमाही में उपभोक्ता विश्वास में पिछले साल जुलाई-दिसंबर के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट आई है। इस दौरान अर्थव्यवस्था के लिए उपभोक्ता परिदृश्य और जीवन मानदंड की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
• मास्टरकार्ड उपभोक्ता विश्वास सूचकांक के अनुसार एशिया प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में 18 में से 11 मानकों में उपभोक्ता विश्वास स्थिर रहा जबकि भारत में सभी क्षेत्रों में विश्वास के स्तर में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। मास्टरकार्ड सूचकांक के अनुसार हालांकि भारत (86.0 पर 9.3 अंक नीचे) अभी भी काफी आशाजनक दायरे में है।
• मास्टरकार्ड के इस अध्ययन में अप्रैल से जून 2017 की अवधि में 18 एशिया प्रशांत क्षेत्र बाजारों में 18 से 64 वर्ष के 9,153 लोगों से पूछताछ की गई। उनसे पांच आर्थिक क्षेत्रों में परिदृश्य के बारे में पूछा गया। उनसे अर्थव्यवस्था, रोजगार संभावना, नियमित आय संभावना, शेयर बाजार और जीवन स्तर के बारे में पूछा गया।
• सूचकांक को 0 से 100 के पैमाने पर मापा गया है। शून्य को सबसे निराशावादी जबकि 100 को सबसे ज्यादा आशावादी बताया गया है। 40 से 60 के दायरे में आए निष्कर्ष को निरपेक्ष माना गया है।
• रिपोर्ट के अनुसार, सभी पांचों मानकों में हालांकि गिरावट दर्ज की गई है लेकिन अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता परिदृश्य और जीवन गुणवत्ता में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इस सूचकांक में 88.2 अंक के साथ चीन, भारत से ऊपर है और उसने सभी पांचों क्षेत्रों में सुधार दर्ज किया है। खासतौर से रोजगार के मामले में अच्छी वृद्धि रही है।
• समूचे एशिया प्रशांत क्षेत्र में 66.9 अंक के साथ कुल मिलाकर उपभोक्ता विास उम्मीद के दायरे में रहा। यह छह माह पहले के 62.7 अंक से मामूली सुधार दर्शाता है। इस सुधार के लिए शेयर बाजार और रोजगार के क्षेत्र में तेजी की उम्मीद रही है।
8. ट्रंप आज बताएंगे अपनी अफगान नीति
• ट्रंप प्रशासन की नई अफगान रणनीति के किसी भी नतीजे को संतुलित करने के लिए पाकिस्तान को चीन और रूस के साथ कहीं गहरे संबंध बनाने की कोशिश करनी पड़ सकती है। यह बात मीडिया में आई एक रिपोर्ट में कही गई है।
• ट्रंप मंगलवार को युद्धप्रभावित अफगानिस्तान के लिए बहुप्रतीक्षित नई रणनीति की घोषणा करने वाले हैं। खबरों में कहा गया है कि अपनी नीति की समीक्षा के दौरान ट्रंप प्रशासन ने भारत की भूमिका की संभावनाओं पर गौर किया और मंगलवार को अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस ने इस बात की पुष्टि की कि नई नीति एक पूर्ण दक्षिण एशिया रणनीति है।
• द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस योजना से परिचित दो अधिकारियों के हवाले से कहा, पाकिस्तान नई अफगान रणनीति के किसी भी परिणाम को संतुलित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।
• रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि वाशिंगटन से मिल रहे संकेतों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाले महीनों में इस्लामाबाद के धैर्य की निश्चित तौर पर परीक्षा होगी।
• एक अधिकारी ने दैनिक अखबार को बताया कि अमेरिका की ओर से कोई कठोर कदम उठाए जाने की सूरत में पाकिस्तान के पास चीन और रूस के साथ अपना सहयोग बढ़ाने और गहराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।पाकिस्तान और चीन के बीच एक सर्वकालिक संबंध है। दोनों देशों के नेताओं ने इस संबंध को बेहद मजबूत संबंध कहा है।
• कुछ साल पहले बीजिंग की ओर से ‘‘वन बेल्ट, वन रोड’ पहल की घोषणा किए जाने पर इनका संबंध आगे बढ़ा है। दोनों देशों के बीच एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत 50 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान आर्थकि गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है।
• रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूस के साथ पाकिस्तान के संबंध भी शीत युद्ध के दौर की शत्रुताओं से आगे बढ़ चुके दिखाई देते हैं। आकस्मिक स्थितियों में पाकिस्तान की पहली योजना के बारे में अधिकारी ने कहा, यदि अमेरिका हमारी वाजिब चिंताओं पर गौर नहीं करता और बस भारत की ही लाइन पर आगे बढ़ता है तो हम निश्चित तौर पर चीन और रूस की ओर चले जाएंगे।
• अफगानिस्तान के लिए अमेरिका की नई रणनीति पाकिस्तान को हक्कानी नेटवर्क समेत कुछ आतंकी समूहों से अपना गठजोड़ तोड़ने के लिए विवश करने के लिए उसके खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग कर सकती है। ट्रंप प्रशासन के बयानों समेत हालिया घटनाक्म यह संकेत देता है कि पाकिस्तान के साथ कड़ा रुख अपनाने के लिए वाशिंगटन में आम सहमति बन रही है।
• फॉरेन पॉलिसी पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रंप पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी सैन्य मदद खत्म करने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस्लामाबाद वाशिंगटन के साथ धोखाधड़ी कर रहा है।

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