अतिथि शिक्षक नियमितीकरण की वास्तविकता
अतिथि शिक्षक नियमितीकरण की वास्तविकता
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1- जब अतिथि शिक्षक के लिए रखा जाता है तो उसमें स्पष्ट लिखा रहता है कि आप केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए है आप किसी प्रकार की नियुक्ति की दावेदारी नहीं कर सकते तो फिर नियमितीकरण किस बात का
2- अतिथि शिक्षक कहते हैं कि हमने 10 साल तक पढ़ाया है आपके लिए किसी ने जबरदस्ती करके पढ़ाने पर दबाव नहीं डाला आप नियमितीकरण की लालच के कारण ही पढ़ा रहे थे आपकी कार्य के लिए आपको वेतन दिया गया है
3- यह बात सभी जानते हैं कि 90% अतिथि शिक्षक अपनी पहचान वालों को ही स्कूल में लगाया गया है तो नियमितीकरण किस बात का
4- अतिथि शिक्षक कहते हैं हमने 10 साल पढ़ाया है तो फिर टेस्ट देने से क्यों घबरा रहे पढ़ाने से आपका अनुभव बड़ा है ना कि कम हुआ है
5- National Council for Teacher Education, मध्य प्रदेश में हुई 2011 की भर्ती में निर्देश दे चुका है कि किसी को शिक्षक भर्ती में कोई विशेष लाभ ना देने के साथ-साथ बिना टीईटी पास के नियुक्ति नहीं दी जा सकती
6- नियमितीकरण की मांग कर रहे ज्यादातर अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिनका D.Ed B.Ed नहीं है और है भी तो अनुभव एवं डिग्री एक ही सत्र की है
7- अतिथि शिक्षक के बने अध्यक्ष उपाध्यक्ष में से 90% इस टेस्ट को क्वालीफाई करने की योग्यता नहीं रखते इसलिए वह सभी अतिथियों को भ्रमित करने का प्रयास करते रहते हैं
8- वर्तमान समय में अतिथि शिक्षक की संख्या लगभग एक लाख से ऊपर पहुंच गई है आप अपने स्वयं विवेक से इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि कोई भी सरकार क्या एक लाख तिथियों को नियमित कर सकती है
9- अतिथि शिक्षक कहते हैं गुरुजीयों की तरह उनका भी नियमितीकरण किया जाए सभी की जानकारी के लिए बता दूं कि गुरुजीओं की संख्या बहुत कम थी और साथ-साथ परियों के लिए शासन स्तर पर नियुक्ति पत्र देकर रखा गया था, और गुरुजी की व्यवस्था लगभग 20 वर्ष पुरानी है अर्थात आरटीई 2009 के पहले की इसलिए उनको नियमित किए जाने में कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी
10- अगर सरकार को अतिथि शिक्षकों के लिए नियमितीकरण करना ही होता तो वह लोकसभा चुनाव से पहले करने की घोषणा करती सरकार B.Ed D.Ed और अतिथि शिक्षकों में फूट डालकर भर्ती को रद्द करने का प्रयास कर रही है
11- जैसा की हाल ही में उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अतिथि शिक्षकों के लिए नियमित कर दिया गया था लेकिन न्यायालय ने नियमितीकरण को नियम के विरुद्ध बता कर रद्द कर दिया था इस प्रकार मध्य प्रदेश में भी यदि नियमितीकरण किया जाता है तो वह भी रद्द हो जाएगा और सरकार इस बात से भलीभांति परिचित है इसलिए राजनीतिक दांव पेच में अतिथियों को उलझा रखेगी
12- यदि भर्ती लोकसभा चुनाव से पहले नहीं हुई तो भर्ती 4 साल के लिए टल सकती है जिससे अतिथियों की संख्या में और वृद्धि होगी और वास्तविक अतिथियों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा ऑनलाइन प्रक्रिया में पुराने अतिथि बाहर हो जायेंगे
13- अतिथि शिक्षकों के लिए मिला 25% आरक्षण नियम के विरुद्ध है फिर भी D.Ed B.Ed वालों ने यह सोच कर कोर्ट की शरण नहीं ली की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हो जाए लेकिन यह भर्ती यदि लोकसभा चुनाव से पहले नहीं हुई तो D.Ed B.Ed वालों के पास कोर्ट में याचिका लगाने और सरकार पर दबाव बनाने का पर्याप्त समय मिल जाएगा जिससे अतिथियों का 25% आरक्षण भी खत्म हो जाएगा
14 अतिथि शिक्षक कहते हैं की उनकी विभागीय परीक्षा ली जाए बिल्कुल विभागीय परीक्षा ली जा सकती है लेकिन कोई अतिथि शिक्षक यह बता दें कि उनके पास क्या सबूत है कि वह विभागीय कर्मचारी है संविदा कर्मी एवं अतिथि शिक्षक में जमीन आसमान का अंतर है
15- चलो मान लिया सरकार अतिथि अतिथि की परीक्षा ले लेगी वहीं 25% सीटों की परीक्षा लेकर एक नियुक्तियां दे देगी लेकिन वह भी तब जब नियम अनुसार टीईटी 60% के साथ पास होगी तभी
16- यदि अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण किया गया तो क्या लगभग 8 लाख से ऊपर D.Ed B.Ed वाले शांत बैठेगे
अभ्यार्थी कोर्ट जाएंगे एवं आंदोलन करेंगे और भर्ती कई महीनों सालों तक कानूनी पैच में फंसी रहेगी सरकार भी यही चाहती है कि भर्ती कानूनी पैच में फंसे रहे क्योंकि जब 5000 में पढ़ाने वाले मिल रहे हैं तो फिर 35-40 हजार क्यों बर्बाद किए जाएं
और अंत में केवल यही कहना चाहता हूं कि मेरे सभी सम्मानीय एवं प्रिय अथिति बंधुओं वास्तविकता को समझने का प्रयास करें यदि शिक्षक भर्ती लोकसभा से पहले नहीं हुई तो फिर 4 साल ऐसे ही सरकार अतिथि शिक्षकों से काम चलाएगी जो की चॉइस फिलिंग में पुराने अतिथि बाहर हो जाएंगे और नई अतिथि आ जाएंगे कुछ मूर्ख लोगों के कारण आप ओवर एज हो जाएंगे और अतिथि अतिथि करते जिंदगी निकल जाएगी एक मौका मिला है अपना हुनर दिखाने का D.Ed B.Ed वालों के साथ मिलकर परीक्षा करवाने की योजना बनाएं कुछ धूर्त लोगों के साथ मिलकर अपनी जिंदगी दांव पर मत लगा जो समझदार है वह समझ जाएंगे और जो धूर्त होंगे उसको मिर्ची जरूर लगेगी क्योंकि सच कड़वा होता है
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1- जब अतिथि शिक्षक के लिए रखा जाता है तो उसमें स्पष्ट लिखा रहता है कि आप केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए है आप किसी प्रकार की नियुक्ति की दावेदारी नहीं कर सकते तो फिर नियमितीकरण किस बात का
2- अतिथि शिक्षक कहते हैं कि हमने 10 साल तक पढ़ाया है आपके लिए किसी ने जबरदस्ती करके पढ़ाने पर दबाव नहीं डाला आप नियमितीकरण की लालच के कारण ही पढ़ा रहे थे आपकी कार्य के लिए आपको वेतन दिया गया है
3- यह बात सभी जानते हैं कि 90% अतिथि शिक्षक अपनी पहचान वालों को ही स्कूल में लगाया गया है तो नियमितीकरण किस बात का
4- अतिथि शिक्षक कहते हैं हमने 10 साल पढ़ाया है तो फिर टेस्ट देने से क्यों घबरा रहे पढ़ाने से आपका अनुभव बड़ा है ना कि कम हुआ है
5- National Council for Teacher Education, मध्य प्रदेश में हुई 2011 की भर्ती में निर्देश दे चुका है कि किसी को शिक्षक भर्ती में कोई विशेष लाभ ना देने के साथ-साथ बिना टीईटी पास के नियुक्ति नहीं दी जा सकती
6- नियमितीकरण की मांग कर रहे ज्यादातर अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिनका D.Ed B.Ed नहीं है और है भी तो अनुभव एवं डिग्री एक ही सत्र की है
7- अतिथि शिक्षक के बने अध्यक्ष उपाध्यक्ष में से 90% इस टेस्ट को क्वालीफाई करने की योग्यता नहीं रखते इसलिए वह सभी अतिथियों को भ्रमित करने का प्रयास करते रहते हैं
8- वर्तमान समय में अतिथि शिक्षक की संख्या लगभग एक लाख से ऊपर पहुंच गई है आप अपने स्वयं विवेक से इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि कोई भी सरकार क्या एक लाख तिथियों को नियमित कर सकती है
9- अतिथि शिक्षक कहते हैं गुरुजीयों की तरह उनका भी नियमितीकरण किया जाए सभी की जानकारी के लिए बता दूं कि गुरुजीओं की संख्या बहुत कम थी और साथ-साथ परियों के लिए शासन स्तर पर नियुक्ति पत्र देकर रखा गया था, और गुरुजी की व्यवस्था लगभग 20 वर्ष पुरानी है अर्थात आरटीई 2009 के पहले की इसलिए उनको नियमित किए जाने में कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी
10- अगर सरकार को अतिथि शिक्षकों के लिए नियमितीकरण करना ही होता तो वह लोकसभा चुनाव से पहले करने की घोषणा करती सरकार B.Ed D.Ed और अतिथि शिक्षकों में फूट डालकर भर्ती को रद्द करने का प्रयास कर रही है
11- जैसा की हाल ही में उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अतिथि शिक्षकों के लिए नियमित कर दिया गया था लेकिन न्यायालय ने नियमितीकरण को नियम के विरुद्ध बता कर रद्द कर दिया था इस प्रकार मध्य प्रदेश में भी यदि नियमितीकरण किया जाता है तो वह भी रद्द हो जाएगा और सरकार इस बात से भलीभांति परिचित है इसलिए राजनीतिक दांव पेच में अतिथियों को उलझा रखेगी
12- यदि भर्ती लोकसभा चुनाव से पहले नहीं हुई तो भर्ती 4 साल के लिए टल सकती है जिससे अतिथियों की संख्या में और वृद्धि होगी और वास्तविक अतिथियों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा ऑनलाइन प्रक्रिया में पुराने अतिथि बाहर हो जायेंगे
13- अतिथि शिक्षकों के लिए मिला 25% आरक्षण नियम के विरुद्ध है फिर भी D.Ed B.Ed वालों ने यह सोच कर कोर्ट की शरण नहीं ली की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हो जाए लेकिन यह भर्ती यदि लोकसभा चुनाव से पहले नहीं हुई तो D.Ed B.Ed वालों के पास कोर्ट में याचिका लगाने और सरकार पर दबाव बनाने का पर्याप्त समय मिल जाएगा जिससे अतिथियों का 25% आरक्षण भी खत्म हो जाएगा
14 अतिथि शिक्षक कहते हैं की उनकी विभागीय परीक्षा ली जाए बिल्कुल विभागीय परीक्षा ली जा सकती है लेकिन कोई अतिथि शिक्षक यह बता दें कि उनके पास क्या सबूत है कि वह विभागीय कर्मचारी है संविदा कर्मी एवं अतिथि शिक्षक में जमीन आसमान का अंतर है
15- चलो मान लिया सरकार अतिथि अतिथि की परीक्षा ले लेगी वहीं 25% सीटों की परीक्षा लेकर एक नियुक्तियां दे देगी लेकिन वह भी तब जब नियम अनुसार टीईटी 60% के साथ पास होगी तभी
16- यदि अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण किया गया तो क्या लगभग 8 लाख से ऊपर D.Ed B.Ed वाले शांत बैठेगे
अभ्यार्थी कोर्ट जाएंगे एवं आंदोलन करेंगे और भर्ती कई महीनों सालों तक कानूनी पैच में फंसी रहेगी सरकार भी यही चाहती है कि भर्ती कानूनी पैच में फंसे रहे क्योंकि जब 5000 में पढ़ाने वाले मिल रहे हैं तो फिर 35-40 हजार क्यों बर्बाद किए जाएं
और अंत में केवल यही कहना चाहता हूं कि मेरे सभी सम्मानीय एवं प्रिय अथिति बंधुओं वास्तविकता को समझने का प्रयास करें यदि शिक्षक भर्ती लोकसभा से पहले नहीं हुई तो फिर 4 साल ऐसे ही सरकार अतिथि शिक्षकों से काम चलाएगी जो की चॉइस फिलिंग में पुराने अतिथि बाहर हो जाएंगे और नई अतिथि आ जाएंगे कुछ मूर्ख लोगों के कारण आप ओवर एज हो जाएंगे और अतिथि अतिथि करते जिंदगी निकल जाएगी एक मौका मिला है अपना हुनर दिखाने का D.Ed B.Ed वालों के साथ मिलकर परीक्षा करवाने की योजना बनाएं कुछ धूर्त लोगों के साथ मिलकर अपनी जिंदगी दांव पर मत लगा जो समझदार है वह समझ जाएंगे और जो धूर्त होंगे उसको मिर्ची जरूर लगेगी क्योंकि सच कड़वा होता है
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